Savitri Era of those who adore, Om Sri Aurobindo and The Mother.

Tuesday, September 11, 2007

स्वामी दयानंद ने अंधविश्वास, पाखंड, जातिवाद, छूआछूत, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि भयंकर बीमारियों से छुटकारा दिलाने का प्रयास किया

Monday 10 September 2007 एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

प्रदीप हरित, कैथल । सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद द्वारा स्थानीय परिषद भवन में आज भारतीय संस्कृति आज का युवा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता दर्शन सिंह मालखेड़ी थे। दर्शन सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति के महान जनक स्वामी दयानंद, विवेकानंद, बुद्ध जैसे महान सन्यासी हिंदुस्तान की धरती पर पैदा न होते तो आज हम यह स्वतंत्र जिंदगी नहीं जी रहे होते। स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना कर अंधविश्वास, पाखंड, जातिवाद, छूआछूत, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि भयंकर बीमारियों से छुटकारा दिलाने का प्रयास किया। वहीं विवेकानंद ने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार कर पश्चिमी देशों को झुकने पर मजबूर कर दिया। बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्व ने राजशाही छोड़ त्याग व तपस्या कर इस देश में ध्यान व प्राणायाम को बड़ी सुंदरता से बिखेरा। उन्होंने कहा कि इन सब बातों को युवाओं को आगे बढ़ाना चाहिए। भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में सिरमौर है। पूर विश्व भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए तौर है। उन्होंने कहा कि कितने खेद की बात है कि आज का भारतीय युवा वर्ग भारतीय संस्कृति को छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने की होड़ में लगा हुआ है। दर्शन सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति अमर क्रातिं का नाम है। एक ऐसी क्रातिं जिसने प्रयत्नशील प्रवाह से नई चेतना और दिव्य आलोक बिखेर दिया। HomeContact UsImage GalleryTariffHaryana जिलेवार खबरें

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